तरुणा सेठी 2015 में अमेरिका से मुंबई आ गई। यहां आने के बाद उन्होंने रजाई बनाने का काम शुरू किया। महामारी के बीच अगस्त से तरुणा ने 'करूणा क्विल्ट मूवमेंट' की शुरुआत की। तब से तरुणा फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए रजाई बना रही हैं। 15 नवंबर से अब तक वे 100 रजाई बनाकर इन वर्कर्स में मुफ्त बांट चुकी हैं।

तरुणा अगस्त 2021 तक 75 वें स्वतंत्रता दिवस पर 1,000 रजाई बनाकर फ्रंटलाइन वर्कर्स में बांटने की ख्वाहिश रखती हैं। वे कहती हैं - ''ऐसे सभी लोग जो कोरोना काल में लोगों की सेवा के काम से जुड़े हैं, ये रजाई मुफ्त में पा सकते हैं। जैसे एक ड्राइवर जो हॉस्पिटल से लेकर ऑपरेशन थियेटर में मरीजों के लिए जरूरी सामान पहुंचाता है। ऐसे ड्राइवर्स या हमारी जिंदगी बचाने वाले अन्य क्षेत्रों में भी काम कर रहे लोगों तक मैं रजाई पहुंचाना चाहती हूं''।
तरुणा ने कुछ सालों पहले फ्लोरिडा में रहते हुए पैचवर्क वाली रजाईयां बनाना सीखा था। वहां उसने देखा कि कुछ सामाजिक आंदोलन के तहत लोग ब्लॉक्स बनाकर रजाई बनाने वाली संस्था को दान करते हैं। इन ब्लॉक्स का इस्तेमाल पैचवर्क वाली रजाई बनाने में किया जाता है। तरुणा ने महामारी के दौरान इसी तरह की पैचवर्क वाली रजाई बनाकर बांटने की शुरुआत की।

तरुणा के अनुसार, ''इस तरह के ब्लॉक बनाकर मुझे कोई भी डोनेट कर सकता है। फिर चाहे वह पेंट किए हुए हो, बुने हो या उन पर कढ़ाई की गई हो''। फिलहाल वे बिहार के दरभंगा जिले के बल्लाह गांववासियों को इस तरह की रजाई बनाना सीखा रही हैं। इससे गांव वालों को रोजगार तो मिला ही है, साथ ही तरुणा का प्रोजेक्ट भी तेजी से काम कर ज्यादा से ज्यादा फ्रंटलाइन वर्कर्स को कड़कड़ाती ठंड के बीच रजाई मुहैया करा रहा है।
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