रांची के पास दाहू गांव में जीतन देवी बांस से कई आकर्षक वस्तुएं बनाती हैं। उन्होंने अन्य महिला कारीगरों को भी ये काम करने की प्रेरणा दी है। इस गांव में लोगों को रोजगार के नए अवसर देने में जीतन देवी का अहम योगदान है। फिलहाल वे झारखंड सरकार से नई मशीनों की मांग कर रही हैं ताकि वे ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट्स बना सकें। जीतन के साथ लगभग 30 महिलाएं काम कर रही हैं। जितने अब अन्य गांवों में जाकर भी महिलाओं को बांस से अलग-अलग चीजें बनाना सिखाती हैं।

जीतन देवी मानती हैं कि उनके बांस से बने प्रोडक्ट ही उनकी परंपरा रहे हैं। इस महामारी के बारे में बात करने और इसके माध्यम से जीवित रहने के बारे में उन्होंने बताया कि इस दौरान हमारे उत्पादों को छठ पूजा और शादियों के दौरान बेचा जा रहा था। हम इन चीजों को बाजार में बेचने के लिए अपने प्रोडक्ट्स का स्टॉक बनाए रखते हैं।

जीतन देवी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद भी बांस से बने प्रोडक्ट की मांग कम हो गई थी। ऐसे वक्त में उन्होंने अन्य महिलाओं के साथ मिलकर ये चीजें बनाई। उन्होंने राज्य आजीविका संवर्धन सोसायटी के तहत ट्रेनिंग भी ली। जीतन देवी ने ओडिशा में रहते हुए सात साल तक ट्रेनिंग ली। उन्हें ट्रेनिंग के दौरान रोज 10 रुपए मिलते थे। खुद सीखने के बाद अब वे अपने पति के साथ अलग-अलग जगह पर जाकर लोगों को बांस से प्रोडक्ट बनाने की ट्रेनिंग देती हैं।

पहले वे बांस से बने जिन प्रोडक्ट्स को 1500 से 2000 रुपए में बेचती थीं, वहीं मॉडर्न टच के साथ अब 10,000 से 12,000 रुपए में बिक रहे हैं। उन्हें विभिन्न एनजीओ से बल्क ऑर्डर भी मिलता है जिससे अच्छा-खासा मुनाफा होता है। इस काम को करते हुए उन्हें खूब सम्मान मिला है।



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Jiten Devi women of Dahu village, Ranchi, are trying to make babu products, demand for new machines from Jharkhand government


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