लाइफस्टाइल डेस्क. दिल्ली की रहने वाली रिया यूके में 10 साल काम करने के बाद भारत आकर अपने व्यवसाय की शुरुआत की। रिया सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ मुहिम चला रहीं है। उन्होंने 2009 में अपना खुद का व्यवसाय इकोवेयर शुरू किया। इकोवेयर प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर स्ट्रा, प्लेट, कप, कटोरे, ट्रे के कम्पोस्टेबल कटलरी बेचती है, जिनसे कोई नुकसान नहीं होता और ये प्राकृतिक रूप से नष्ट हो जाते हैं।
मां को कैंसर से लड़ता देख मिली प्रेरणा
रिया मजूमदार सिंघल मुम्बई में पैदा हुईं और दुबई में पली-बढ़ीं। आगे चलकर उन्हें पढ़ाई के लिए लंदन के बोर्डिंग स्कूल में भेज दिया गया, जहां उन्होंने ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी से फार्माकोलॉजी ऑनर्स किया। शादी के बाद उन्हें पहली बार 29 साल की उम्र में भारत आने का मौका मिला। यहां जगह-जगह प्लास्टिक का कचरा देखकर उन्हें बहुत दुख हुआ। एक फार्मा ग्रेजुएट के तौर पर वे प्लास्टिक से हैल्थ पर होने वाले नुकसानों से अच्छी तरह वाकिफ थीं।
यही नहीं, अपनी मां को बहुत ही कम उम्र में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से लड़ते देखकर उनका नजरिया चीजों के प्रति बहुत बदल गया था फार्माकोलॉजी के क्षेत्र में अपनी जानकारी और ज्ञान की मदद से उन्होंने कैंसर के कारणों को समझने की कोशिश की तो पाया कि प्लास्टिक का इस्तेमाल इसका एक मुख्य कारण था।

ग्रासरूट लेवल से की शुरुआत
रिया बताती है कि वह सदर बाजार से लेकर चांदनी चौक तक जा कर लोगों को प्लास्टिक के नुकसान के बारे में समझाती थीं और कॉम्पोस्टेबल के लिए जागरुक करतीं थीं। लेकिन उस समय लोगों ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया। फिर उन्होनें ग्रासरूट लेवल से इसकी शुरुआत की और उन्हें पूरा भरोसा था कि जल्द ही उनका आईडिया लोगों को पसंद आएगा।
प्लास्टिक का विकल्प बना बिजनेस आइडिया
रिया ने विदेशों में लोगों को प्लास्टिक की जगह लकड़ी के पल्प से बनी कटलरी काम में लेते देखा था, जबकि भारत में प्लास्टिक का बहुतायत से उपयोग किया जाता है। इसलिए प्लास्टिक के ईको-फ्रेंडली विकल्प तैयार करने के आइडिया के साथ उन्होंने परिवार व दोस्तों की सहायता से वर्ष 2009 में ईको-फ्रेंडली टेबलवेयर के निर्माण के लिए स्टार्टअप, ईकोवेयर की शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने खेतों से निकलने वाले कचरे का इस्तेमाल किया।

शुरुआत में करना पड़ा रिजेक्शन का सामना
इस वेंचर से जुड़े शुरुआती अनुभवों और संघर्षों के बारे में बताते हुए रिया कहती हैं कि उनके इस वेंचर की शुरुआत के पीछे कैंसर की रोकथाम करना और उपभोक्ताओं को प्लास्टिक का विकल्प देना प्रमुख वजह रही। उन्होंने बताया कि वह गुड़गांव के एक लोकप्रिय स्टोर पर गई, जहां उन्होनें अपने नए प्रोडक्ट और कमंपोस्टबल के बारे में बताया तो लोगों ने लेने से इंकार कर दिया। जिसके बाद पीएम के प्लास्टिक मुक्त भारत की अपील पर उस स्टोर के मालिक ने फोन कर उनसे इस उनके प्रोडक्ट की मांग की।
कम समय में मिली सफलता
बहुत कम समय में रिया का बिजनेस इतना सफल हो गया कि उन्हें पीछे मुड़कर देखने की जरूरत नहीं पड़ी। रिया लगातार लोगों को सिंगल प्लास्टिक यूज से होने वाले नुकसान के बारे में जागरुक करती रहती हैं। इसके लिए पहले उन्होंने खुद मार्केटिंग की कमान संभाली और लोगों को जागरूक करने के साथ ही उन्हें प्लास्टिक के खतरे बताने के लिए मेहनत की। आज उनके क्लाइंट बेस में हल्दीराम, चायोस, अमेरिकन एम्बेसी स्कूल, ओबेरॉय होटल जैसे नाम शामिल हैं। वर्ष 2009 में शुरू की गई उनकी कंपनी का टर्नओवर एक दशक में 25 करोड़ रुपए को पार कर चुका है।

आज देश-विदेश में मिली खासी पहचान
रिया बताती हैं कि उन्होंने जब ईकोवेयर की शुरूआत की तो लोगों ने बहुत अधिक रेस्पॉन्स नहीं दिया, लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 के दौरान उन्हें अपने प्रॉडक्ट्स को सप्लाई करने का मौका मिला। इस बात को लेकर उन्हें संतुष्टि है कि वे पर्यावरण के लिए कुछ कर पा रही हैं। इसके लिए हाल ही उन्हें राष्ट्रपति के हाथों से नारी शक्ति अवॉर्ड भी मिल चुका है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम ने भी उन्हें ग्लोबल लीडर मानते हुए वुमन ऑफ एक्सिलेंस अवॉर्ड दिया है।
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