मिस्र में लेखा अल खोली के पापा जब अपनी कार रिपेयर वर्कशॉप के लिए सामान लेने जाते तो अपने साथ लेखा को भी ले जाते। इस बीच कई बार वे प्यार से लेखा के चेहरे पर इंजिन ऑइल लगा देते। ये कभी लेखा के पापा ने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन यही बेटी बड़े होकर मैकेनिक बन जाएगी। आज 24 साल की लेखा मैकेनिक बनकर कार के पुर्जों को ठीक करते हुए देखी जा सकती है।

वे एक दशक से भी अधिक समय से मिस्र के एसना गांव में रहते हुए ये काम कर रही हैं। वे मिस्र की पहली महिला मोटर मैकेनिक हैं। इस महीने लेखा ने लग्जर में अपना खुद का कार मेंटेनेंस सेंटर खोला है। वे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस क्षेत्र में लाने का प्रयास कर रही हैं। खासतौर से वे महिलाएं जिन्हें पारिवारिक दबाव के चलते अपने करिअर चुनने की आजादी नहीं मिलती।
खोली के ऑफिस में उनके स्वर्गीय पापा की फोटो लगी हुई है। उन्होंने बताया कि मैं न सिर्फ अपना करिअर ड्रीम पूरा करने की कोशिश कर रही हूं। बल्कि उन महिलाओं की भी मदद कर रही हूं जो सामाजिक चुनौतियों की वजह से मैकेनिक नहीं बन पाती। उन्हें इस बात की खुशी है कि वे अपने पापा के सपोर्ट की वजह से मैकेनिक बन सकी। महज 11 साल की उम्र में लेखा का इस क्षेत्र में शौक देखकर उनके पापा ने उन्हें आगे बढ़ने में मदद की थी। 2016 में लेखा के पापा इस दुनिया में नहीं रहे।

थॉमसन राइटर्स फाउंडेशन को दिए अपने इंटरव्यू में लेखा ने बताया - ''मुझे यकीन है ऐसी कई महिलाएं हैं जो मेरी तरह इस काम को पूरी लगन के साथ करना चाहती हैं। लेकिन परिवार का सपोर्ट न मिलने की वजह से उनके सपने अधूरे ही रह जाते हैं''। खोली अपने होमटाउन तांता में उन महिलाओं के लिए वर्कशॉप का आयोजन करती हैं जो मैकेनिक बनना चाहती हैं। लगभग 20 महिलाओं ने खोली से मैकेनिक की ट्रेनिंग ली है।
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